Saturday, 20 June 2015

For MJMC sem-2" beware of our receptionist"

शायद ही वो समय हम सब में से कोई भूल सकता है। जब फेयरवेल पार्टी के लिए जगह तलाशने की जदोजहत मे, मैं और निधि निकल पड़े पुराना लखनऊ को तराशने (इस शब्द का इस्तेमाल इसलिए भी किया गया है क्योंकि कई रेस्टोरेंट के मालिको को हुमलोग काम करने के सलीके भी सीख आए थे) । एक ज़िद भी थी की सबको ये साबित करने है की पुराना लखनऊ नए लखनऊ से अच्छा ,सस्ता और सुन्दर है। वहा तपती धुप में मुझे निधि के स्कूटी पे 'पलक होटल' दिखा , जो सामने से तो ठीक ही दिख रहा था......फिर सोचा क्या पता अंदर से अच्छा हो। पार्टी के होस्ट की हैसियत से बात करने का तमगा ज़िन्दगी में पहली बार हासिल किया था, इसलिए हम दोनों पुरे टशन में अंदर जा पहुचे......आँखों ने जैसे ही जगह का दीदार किया ,मैं और निधि दोनों ही जुड़वाँ बच्चों की तरह एक साथ बोल पड़े डन(done) .....इतनी ख़ुशी की हुमदोनो बर्दाश्त ही नही कर पा रहे थे और रिसेप्शनिस्ट से बात भी पूरी बत्तीसी दिखा कर कर रहे थे........कोशिश थी कि उसे ये एहसास न हो की ये जगह देख के हम दोनों मगन हो चुके है , पर क्या करे दिल तो बच्चा है जी......थोडा कच्चा है जी। बात करने की तमीज तो थी नही फिर भी किसी तरह हम दोनों ने बात कर के पूरा बजट लिखवा लिया और उसको ये आश्वासन तक दे डाला की कल, परसो हम सब यहाँ आएँगे फिर बात पक्की कर देंगे। इतना कहते ही हुमदोनो मुस्कुराते हुए वहा से निकले और घर को चले गए। उस दिन शाम तक पुरे भोकाल से सबको फ़ोन करके बता दिया की बहुत अच्छी जगह मिली है ,शायद ही कोई ढूंढ पाए ऐसी जगह 'feeling party at taj mahal ' जैसे हालात थे......
दूसरे दिन सबको इकठा कर निकल पड़े जब तीन यार तो बात ही क्या? पर लोग तीन से ज़्यादा हो तो कांड ही क्या?.....हम सब मतलब मैं,पूजा,सोनाली,निधि,सौरभ,सुशील,आकाश,पंकज,आशुतोष,विकास । हम सबको देख के वो रिसेप्शनिस्ट खुश हो गई ,उसे लगा आज तो एडवांस पक्का है.....जब बजट की बात हुई तो हम मासूमो के चेहरे देख कर उसने थोडा रहम किया , उसने सारा मामला थोडा और सीधा और छोटा कर दिया...हम सब थोड़े खुश हुए फिर जा के  म्यूजिक सिस्टम चेक किया तो उसने और निराश कर दिया ,एक छोटा सा प्लेयर जिससे ज़्यादा आवाज़ तो मेरी बुलंद थी....हम वो गलती भी नही दोहराना चाहते थे जो फ्रेशर्स के समय म्यूजिक को लेकर होगई थी.....पर जगह इतनी सुन्दर थी की हमसब वही पार्टी करना चाह रहे थे । पूरा पार्टी का महल ढहता जा रहा था। अब जब हम सब सोच में पड़े थे ,तो पूजा बोली 'रुको एक बार मैं कोशिश करती हु ,अगर ये  पैसे कम कर दे तो म्यूजिक का इंतेज़ाम अलग से हो जाएगा '.....शायद पूजा के रूप में एक उम्मीद दिखी तो हुमलोगो ने उसको बात करने को कहा....एक इकलौती उम्मीद वो भी ऐसे भुजी या यु बोले की बूती ....बेचारी रिसेप्शनिस्ट का चेहरा ही बोल उठा 'MJMC SEM-2 not allowed' एक तो वैसे भी 50 लोगो की पार्टी का बजट वो खुद 15 हज़ार में ले आई ..उस पर से हम लोग उसका दिमाग खा गए .....50 लोगो के खाने के लिए सिर्फ 15 रोटियों का आर्डर दे डाला ,स्नैक्स की प्लेट भी 12 तक सिमित कर दी । हुमलोगो का ऐसा सटीक अंदाजा देख कर  पहले तो उसके दिल में तालिया बजी होंगी., फिर वो बौखला कर बोल उठी '50 लोगो की पार्टी है भइया ,इतने में नही होती है,हमारा होटल है, हुमलोग हलवाई नही है' उसकी बातें सुन कर हुमलोगो को हँसी आ गई ,चुकी इतने मासूम चेहरे देख के और खुद प्रोफेशनल हो के उसने अपने आपको काबू में किया ........इससे पहले वो हुमलोगो को काट खाती हम सब वहा से निकल लिए ये आश्वासन देके की सोच कर आपको बताएंगे..,... अब तक तो वो भी समझ चुकी थी की हुमलोग आखिर कितना सोच सकते है । बाहर निकल कर आपस में कुछ बात चीत की फिर हमारी और निधि की पसंद की सबने तारीफ कर सब लोग अपने-अपने रास्ते चल दिए .......उसके बाद मैंने कई बार सोचा कुछ खाने के बारे में उसी रेस्टोरेंट में जा कर कुछ खाने की पर आज भी उस रिसेप्शनिस्ट का चेहरा याद करके हम सहम जाते है ....इससे पहले वो बोर्ड लगा दे 'Not allowed ' का हमे भूखे रहना ही सही लगता है।

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