Wednesday, 3 June 2015

फीफा भ्रष्टाचार का तीसरा पहलु

अभी हाल ही ने आई एक खबर के मुताबिक FIFA(fedration of international football association)  में 950 करोड़ के आस पास घोटाले की कहानी सामने आई है। इससे कई देश और वहा के लोगो में रोष का महौल है।....होना भी चाहिए आखिर उनका पसंदीदा खेल है। उसमे घोटाला हो तो गुस्सा आना ज़ाहिर है।परंतु भारतीयो पर इसका कोई असर नही दिख रहा है क्योंकि हमे क्या लेने देना।वह चाहे जो कुछ हो । हम तो तब कुछ न उखाड़ पाए जब दिल्ली कामनवेल्थ खेलो का भ्रष्टाचार सामने आया था और अब भी कुछ नही कर पा रहे है जब अपने धर्म अपने क्रिकेट (IPL) का कलंक सामने आया है।...शायद हमे चिंता करनी भी नही चाहिए यहाँ क्रिकेट का मसला थोड़े न हुआ है ये तो फुटबॉल का मसला है जिसमे हमारी कोई टीम भी नही है।
असल में हमे ही कुछ करना पड़ेगा, क्योंकि हमारी एक बहुत बड़ी टीम है वहा। ये बात समझने के लिए कुछ आंकड़े पेश है।
FIFA में जो भ्रष्टाचार हुआ उसका सीधा सा कहर क़तर में रह रहे अप्रवासिय भारतीय मज़दूरों को सहना पड़ रहा है ।क़तर एक ऐसा देश है जहा कफाला तंत्र के तहत इंसान ख़रीदा और बेचा जाता है।
नवंबर 14- ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स के मुताबिक क़तर दुनिया में गुलामो की आबादी में 4th स्थान रखता है। वह पर काम कर रहे  गुलामो की संख्या 29400 है जो वहा की आबादी का 1.36% है।
फरवरी 2015- में ये खबर आई थी की क़तर में काम कर रहे 50000 मज़दूरों को ज़बरदस्ती बिना जूतो के  मैराथन में दौड़ाया गया वो भी सिर्फ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम शामिल करने के लिए जो बाद में हो भी न सका।
वहा के कफाला तंत्र के मुताबिक नौकरी देने वाले को नौकरी पाने वाले पे पूरा अधिकार मिल जाता है।यहाँ तक दस्तावेज हासिल करना और नौकरी बदलने तक का भी। वहा हर रोज़ मज़दूरों से 45℃ में 14 घंटे बिना जूते,बिना साफ़ पानी के और बिना खाने के काम करवाते है। महीनो वेतन भी नही देते....
इन सभी अमानवीय हरकतों की असल जड़ है फीफा में हो चूका घोटाला। क़तर ने रिश्वत देके 2022 विश्वकप की मेज़बानी तो अपने हाथ ले ली  पर वहा के एअरपोर्ट,स्टेडियम,होटल,रोड्स की ये हालात नही है की विश्वकप करा सके । क़तर ने अभी तक इन मामूली व्यवस्थाओ के लिए 638000 लाख करोड़ कर्च कर दिए है। एक अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी के मुताबिक 2012-13 में भारत,बांग्लादेश और नेपाल के 964 मज़दूरो की मौत क़तर में होगई , जिनमे ज़्यादा प्रचलित कारण थे हार्ट अटैक और लू लग जाना। ITUF(international trade union federation) के मुताबिक 2022 तक यानि विश्वकप तक ये संख्या 4000 में तब्दील हो जाएगी। भारतीय दूतावास (क़तर) की रिपोर्ट के अनुसार
2012-237
2013-241
2014-224 भारतीय मज़दूरों की मौत हुई है। वहा काम कर रहे आप्रवासिय मज़दूरों में 22% भारतीय वह 16%नेपाली है। क़तर पूरी तरह से अपने कामकाज के लिए अप्रवासिय मज़दूरों पे निर्भर करता है। वहा की वर्क फ़ोर्स 94% अप्रवासिय मज़दूरों की है।
हैरानी की बात ये है की इन सब आकड़ो की जानकारी होने के बावजूद फीफा के अधिकारियो ने क़तर को मेज़बानी सौप दे। फीफा में हुए घोटाले का असर सिर्फ फीफा पे ही नही पड़ा है बल्कि इन मज़दूरों पे भी पड़ा है। इनकी पीड़ा सिर्फ इतनी है की इन से मानवीय तरीको से काम करवाया जाए ,काम करने की बुनियादी सुविधाए दी जाए पर क़तर की सरकार को ये सब न गवार है ।उनको तो बस एक लक्ष्य दिख रहा है(मिशन 2022) वो अपना काम करवाने के लिए साम दाम दंड भेद का भी इस्तेमाल करेंगे। फीफा ने इससे पहले इतनी अस्मवेदंशीलता नही दिखाई पर ये नियत जो न कराए सो कम है।
मुझे अपनी ज़िम्मेदारी लगी आप तक ये बात  पहुचना तो मैंने पंहुचा दी।

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