सुबह 8:30 पर जब आप यूनिवर्सिटी पहुच जाए और अपने डिपार्टमेंट के आस-पास सन्नाटा पसरा देखे तो यही लगता है की इतना सन्नाटा क्यों है भाई!! ।ऐसे में आपका स्वागत सत्कार करने के लिए झड़ते पत्ते कहते है" बहारो पत्ते बरसाओ घर की खाली वेल्ली आई है" ।
अगर हैडफ़ोन न होता तो क्या करते। दिमाग की बत्ती जला पाना तो मुश्किल है पर शायराना दिल भी तो खली ही है ये कहता है।
"फुरसत से करेंगे तुझसे हिसाब ऐ ज़िन्दगी
अभी तो उलझे है हैडफ़ोन को सुलझाने में"
खली दिमाग कुछ भी कर सकता है। चींटियों को उसके घर जाने से रोक सकता है, यहाँ बाहर पड़े पाइप से मालिगिरि भी कर सकता है अगर आप ये सोच रहे है की क्या सच में मैंने ये सब किया है तो हाँ ये सच है।
अब क्या करे यार ये लेख भी तो इसी समय लिख रहे है।
हद है !!!अभी तक कोई नही आया!!!
पर एक शख्स आ चूका है!!!
अपना गरीब मास्टर मुकुल सर समय के पक्के.....पर वो भी बिज़ी है ,अपने काम में ....सुबह-2 क्या पकाऊ उनको!!! चलो जाने दो ।अपने-2 काम में लगो काहे इस वेल्ले लेख को पढ़नेे में लगे हो।
Wednesday, 22 April 2015
"अकेले है तो"
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Sahi h अपना ग़रीब मास्टर
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