मुम्बई पल्टन बोले तो मुम्बई इंडियंस । जिनको कागज़ों पे सबसे बेहतर टीम का दर्जा प्राप्त तो है पर अब वो इतने महान बन गए है की खुद अपना खेल भूल गए है।
आई.पी.एल की सबसे बेहतरीन टीम अब सबसे बेढब टीम बन कर रह गई है। मेरा मन इनकी आलोचना करने का नही है। मैं तो बस इस कोढ़ का होमियोपैथी इलाज कर रही हु जो बीमारी को थोडा और विकराल करती है फिर जड़ से खत्म कर देती है।
प्रिय,
मुम्बई इंडियन, याद करो वो दिन जब रोहित शर्मा की कप्तानी में पिछले साल 2014 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ190 रन सिर्फ 14.2 ओवर में ही बना डाले थे क्योंकि प्ले-ऑफ फ़तेह करना था। आपके पास एक तरफ तो सचिन और जयसूर्या जैसी मज़बूत सलामी जोड़ी रही है तो दूसरी तरफ अम्बाती रायडू जैसे संवेदनशील खिलाडी जो अम्पायर दवारा गलत रन-आउट दिए जाने पर रो पड़े थे। आदित्य तरे!!!! वही खिलाडी जिसने आखिरी गेंद पे छक्का मार कर धोनी की याद दिलाई फिर जर्सी उतार कर दादा गांगुली की......
चलिए सब छोड़िये 2013 का फाइनल तो याद होगा जिसमे लसिथ मलिंगा ने धोनी जैसे फिनिशर को बांध दिया था पूरी टीम को कब्ज़े में ले लिया था ।
वो पोलार्ड की मस्तिया या यु कह ले गुस्ताखियां तो आप भूल ही नही सकते है जब मिशेल स्टॉर्क के पीछे बल्ला ले कर दौड़े थे!!!!
जहां आपने बड़ो को सम्मान दिया ,सचिन खेल नही पा रहे थे फिर भी उनकी महानता को समझते हुए आई.पी.एल की बोली में उनका बचाव कर अपने पास बनाए रखा यही नही जब वो रिटायर हुए तो उनके साथ 10 नंबर की जर्सी भी रिटायर कर दी।
उतार-चढाव ,सम्मान-आलोचना , इन सबकी भेट चढ़ा आपका सफ़र पर ये किसके साथ नही होता। याद करो वो समय जब अपने चाहने वालो के लिए एक-एक मैच पुरे जूनून के साथ खेल और जीता भी आपके खिलाडी सचिन तेंदुलकर के सम्मान में उनके आखिरी छक्के खाने वाली दर्शक दीर्घा को "सचिन तेंदुलकर स्टैंड' के नाम से नवाज़ा गया।
आपके लिए नामुमकिन कुछ भी नही आपका कप्तान रोहित शर्मा तो इतना महान है की अगर 1 गेंद पे 12 रन चाहिए तो वो छक्का मार कर पहले 6 रन जुटाएगा फिर उसका नसीब उस बॉल को नो बॉल करार देगा अब तो फ्री हिट मिल गई !!!!!!!!लगा देगा एक और छक्का ।
आप थोडा भूल रहे है अपने आपको ,अपना खेल फिर से शुरू कीजिये!!!
हम इंतज़ार कर रहे है!!!!
आपकी नफासत के कायल,
खेल दर्शक
Wednesday, 22 April 2015
फिर से खेल शुरू करो
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