इस समय आप जहा है .......ठहर जाए.....आस-पास नज़रे ले जाए और देखे......ज़रा और गौर से देखे।ये जो अर्श से फर्श तक साफ़ सफाई दिख रही है वो बहुत ही छोटी और न अहमियत पाने वाली चीज़ झाड़ू की वजह से है।
अच्छा चलिए ये बताइये की ऐसे कौनसी चीज़ है जिसके बिना आपका जीवन अधूरा है।.....नही.....नही वो झाड़ू नही है वो है स्वछता जिसके बिना आपका जीवन,हमारा भविष्य और ये दुनिया अधूरी है। ऐसे तो और भी कई चीज़े है मसलन पानी.... हवा...पर स्वछता भी इन्ही में से एक ज़रूरत है। तब ही तो हमारे प्रधान मंत्री माफ़ कीजियेगा हमारे प्रधान सेवक आजकल 'स्वछ भारत निर्मल भारत' के पिछे पड़े है वरना इतने बड़े देश के प्रधान मंत्री को अगर देश के और मसलो को छोड़ कर स्वछता पर ध्यान देना पड़े तो इससे ज़्यादा अहमियत की क्या बात हो सकती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री तो झाड़ू की मदद से 67 विधायको के साथ चुनाव जीत कर बाकि सभी पार्टियो का सूपड़ा साफ़ कर दिखा चुके है और अब उसी झाड़ू से वहा की राजनैतिक गंदगी साफ़ करने में लगे है।.......
अब राजनेताओ ने तो इसका खूब इस्तेमाल किया है पर हम अपनी ज़िन्दगी में इसको दरवाज़ों के पीछे ,सोफे, तखत,या पलंग के नीचे पाते है। ऐसा ही कुछ काश हमारी ज़िन्दगी में होता जिसको हम अपने मन के दरवाज़ों के पीछे खयालो के सोफो,तखत या पलंग के नीचे छुपाते और लगभग हर रोज़ मौका लगने पर स्वछता अभियान चला कर उन बखेड़ो को निकाल बाहर कर स्वछ मन निर्मल मन का निर्माण करते।
ऐसा हो सकता है क्या......
हर किसी को ऐसा सोचना चाहिए और अपनी-अपनी ज़िन्दगी में उस झाड़ू को ढूँढना चाहिए जो न जाने अपने मन के कोने में छिपी हुई है ।इस वक़्त ये विषय दो तरफ इशारा करता है पहला तो आपके विचारो के शुद्धिकरण की दूसरी आपको चोट पहुचाने वाले लोगो की यादो के चले जाने पर शुद्धिकरण की । ये बहुत ज़रूरी है साँसो की तरह ज़िंदा रहने के लिए।
कितना कुछ सीखती है ज़िन्दगी में ये छोटी-छोटी चीज़े
ये जीने का मकसद बताती है रहने का तरीका सीखती है और कई बार तो मायने भी बताती है इन चीज़ों का ज़्यादा ज़ोर नही चलता या यु कहे इनकी यहाँ कोई अहमियत नही पर सच तो ये है की इनके बिना हमारी कोई ज़िन्दगी नही बिना झाड़ू के हमारा दिन शुरू नही होता है। ज़रा सोचिये तो अगर झाड़ू न होती तो क्या होता सारी धुल जमती चली जाती और बीमारियो का घर बन जाता हमारा घर .....ये हमें सेहतमंद भी रखती है ।
अगर कल्पना की बात करे तो लोगो ने झाड़ू को बड़ा चढ़ा कर अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाया है मिसाल के तौर पर विलियम शेक्सपिअर अंग्रेजी के महान लेखक (ड्रामा) ने अपने एक नाटक 'मेकबेथ' में अपने तीन पात्रो को झाड़ू की सवारी करवाई ये कह के की वो उड़ सकती है। बाद में इसी को आगे बढ़ाते हैरी पॉटर फ़िल्म के डायरेक्टर ने भी अपनी फ़िल्म को नया और आश्चर्यजनक बनाए के लिए झाड़ू का इस्तेमाल किया और और उनके जादुई स्कूल का एक विशिष्ट हिस्सा दिखाया। लोगोने इन दोनों ही जगहों पर इसके इस्तेमाल को सराहा है क्योंकि ये काल्पनिक थी और झाड़ू जैसी न अहमियत पाने वाली चीज़े में से एक थी।
ज़िन्दगी में बहुत से ऐसे पात्र है जो आपको बहुत कुछ सीखा सकते है बस ज़रूरत है थोडा सा ध्यान देने की और सीखने की छह रखने की । ये तो सिर्फ मेरे विचार मात्र थे। इनको पढ़कर अपने विचार बनाये और अपनी ज़िन्दगी सार्थक करे।
अच्छा चलिए ये बताइये की ऐसे कौनसी चीज़ है जिसके बिना आपका जीवन अधूरा है।.....नही.....नही वो झाड़ू नही है वो है स्वछता जिसके बिना आपका जीवन,हमारा भविष्य और ये दुनिया अधूरी है। ऐसे तो और भी कई चीज़े है मसलन पानी.... हवा...पर स्वछता भी इन्ही में से एक ज़रूरत है। तब ही तो हमारे प्रधान मंत्री माफ़ कीजियेगा हमारे प्रधान सेवक आजकल 'स्वछ भारत निर्मल भारत' के पिछे पड़े है वरना इतने बड़े देश के प्रधान मंत्री को अगर देश के और मसलो को छोड़ कर स्वछता पर ध्यान देना पड़े तो इससे ज़्यादा अहमियत की क्या बात हो सकती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री तो झाड़ू की मदद से 67 विधायको के साथ चुनाव जीत कर बाकि सभी पार्टियो का सूपड़ा साफ़ कर दिखा चुके है और अब उसी झाड़ू से वहा की राजनैतिक गंदगी साफ़ करने में लगे है।.......
अब राजनेताओ ने तो इसका खूब इस्तेमाल किया है पर हम अपनी ज़िन्दगी में इसको दरवाज़ों के पीछे ,सोफे, तखत,या पलंग के नीचे पाते है। ऐसा ही कुछ काश हमारी ज़िन्दगी में होता जिसको हम अपने मन के दरवाज़ों के पीछे खयालो के सोफो,तखत या पलंग के नीचे छुपाते और लगभग हर रोज़ मौका लगने पर स्वछता अभियान चला कर उन बखेड़ो को निकाल बाहर कर स्वछ मन निर्मल मन का निर्माण करते।
ऐसा हो सकता है क्या......
हर किसी को ऐसा सोचना चाहिए और अपनी-अपनी ज़िन्दगी में उस झाड़ू को ढूँढना चाहिए जो न जाने अपने मन के कोने में छिपी हुई है ।इस वक़्त ये विषय दो तरफ इशारा करता है पहला तो आपके विचारो के शुद्धिकरण की दूसरी आपको चोट पहुचाने वाले लोगो की यादो के चले जाने पर शुद्धिकरण की । ये बहुत ज़रूरी है साँसो की तरह ज़िंदा रहने के लिए।
कितना कुछ सीखती है ज़िन्दगी में ये छोटी-छोटी चीज़े
ये जीने का मकसद बताती है रहने का तरीका सीखती है और कई बार तो मायने भी बताती है इन चीज़ों का ज़्यादा ज़ोर नही चलता या यु कहे इनकी यहाँ कोई अहमियत नही पर सच तो ये है की इनके बिना हमारी कोई ज़िन्दगी नही बिना झाड़ू के हमारा दिन शुरू नही होता है। ज़रा सोचिये तो अगर झाड़ू न होती तो क्या होता सारी धुल जमती चली जाती और बीमारियो का घर बन जाता हमारा घर .....ये हमें सेहतमंद भी रखती है ।
अगर कल्पना की बात करे तो लोगो ने झाड़ू को बड़ा चढ़ा कर अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाया है मिसाल के तौर पर विलियम शेक्सपिअर अंग्रेजी के महान लेखक (ड्रामा) ने अपने एक नाटक 'मेकबेथ' में अपने तीन पात्रो को झाड़ू की सवारी करवाई ये कह के की वो उड़ सकती है। बाद में इसी को आगे बढ़ाते हैरी पॉटर फ़िल्म के डायरेक्टर ने भी अपनी फ़िल्म को नया और आश्चर्यजनक बनाए के लिए झाड़ू का इस्तेमाल किया और और उनके जादुई स्कूल का एक विशिष्ट हिस्सा दिखाया। लोगोने इन दोनों ही जगहों पर इसके इस्तेमाल को सराहा है क्योंकि ये काल्पनिक थी और झाड़ू जैसी न अहमियत पाने वाली चीज़े में से एक थी।
ज़िन्दगी में बहुत से ऐसे पात्र है जो आपको बहुत कुछ सीखा सकते है बस ज़रूरत है थोडा सा ध्यान देने की और सीखने की छह रखने की । ये तो सिर्फ मेरे विचार मात्र थे। इनको पढ़कर अपने विचार बनाये और अपनी ज़िन्दगी सार्थक करे।
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