Friday, 10 April 2015

ऐसे चले जब हवा.....इश्क़ हुआ ही हुआ...

सांस रुक-रुक कर आ रही है मेरी
कुछ न कुछ बात होने वाली है
या बहुत दूर जा चूका है कोई
या मुलाकात होने वाली है।

रात हुई और बात वही से बिगड़ गई । लोग परेशान हो जाते है जब उनसे पांच मिनट रुकने को कहा जाता है पर कुछ उस जैसे लोग बिना किसी बात के ज़िन्दगी भर इंतज़ार करते रहते है।
क्यों.....

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ ....क्या है .....
आखिर इस दर्द की दावा....क्या है...
हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद...
जो नही जानते वफ़ा...क्या है....
जान तुम पर निसार करती है
मैं नही जानती दुआ...क्या है...
मैंने माना के कुछ नही ग़ालिब
मुफ़्त हाथ आए तो बुरा..क्या है...

एक आस,एक एहसास मेरी सोच और बस तुम
एक सवाल,एक मजाल,तुम्हारा ख्याल और बस तुम
एक बात,एक शाम,तुम्हारा साथ और बस तुम
एक दुआ,एक फ़रियाद,तुम्हारी याद और बस तूम
मेरा जूनून ,मेरा सुकून,बस तुम बस तुम।

अभी तक लिखी सारी बाते काल्पनिक है। इनका सत्य घटनाओ से कोई तालुख नही है ।पर हाँ सत्य घटनाए इन्ही बातो की वजह से शुरू होती है बस कुछ बदलावो के साथ

फिर जाग उठा है ...पुराने दिनों का दर्द
जी चाहता है ...फिर कोई ताज़ा शेर लिखू

बेहतर होगा अगर आप अपनी आस को अपने एहसास को अपने तक रखे वरना बहुत बुरा होता है ।ये सच है की मोहबत इज़हार चाहती है बार -बार चाहती है पर फिर कुछ माहौल ऐसा नही होता ....कुछ ऐसा हो जाता है....

सुनो
ज़रा सोचो
क्या गुज़रेगी दिल पे तुम्हारे?
तुम चाहो किसी को मेरी तरह
और फिर
कोई छोड़ दे तुम्हे तुम्हारी तरह!!!!!!!!!

1 comment:

  1. क्या बात है !! नहीं कुछ कहकर भी , बहुत कुछ कहना , और सब कुछ बताकर भी, कुछ ना बताना । सभी दिल के मरीजों का यही हाल है ।
    अपना लो उसे ,जो कोई तुम्हें अपना समझे ,

    ये मोहब्बत-ए-इनायत सबके नसीब मे कहाँ -सुशील

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