Monday, 13 April 2015

हिंदुस्तानी तर्क ,वितर्क और कुतर्क

पुरी दुनिया में चाहे किसी भी चीज़ की कोई भी परिभाषा
दे रखी हो .... हिंदुस्तान तक आते-आते बदल ही जाती है इसीलये शायद इसे अनोखा देश कहते है। जहा हर इंसान अपने अलग मायने ले कर चलता है। आज मेरा सौभाग्य था जो एक पेशे से डॉक्टर से मुलाकात हुई ।उनसे मैंने उनका नजरिया जानने की कोशिश की चूँकि वो डॉक्टर के पेशे से तालुक रखते थे "सेवा" पर उनके विचार लेने का विचार मेरे मन में आया.....
        मुह में पान दबाए ,दवाई बनाते वक़्त दुआ पढ़ते हुए जनाब सयेद ज़ैदी जी ने हमसे पूछा की कहा तक पहुची पढाई और आगे क्या उद्देश् है आपका? ..... मैंने पूरी प्रभावी भाव के साथ बोला पत्रकारिता की पढाई कर रही हु ,पत्रकार ही बनना चाहती हु। अगला सवाल वो पूछे इससे पहले मैंने ही पूछ लिया "आपका क्या उद्देश् है"
डॉक्टर-'सेवा'
'कैसे'?
यही क्लिनिक में बैठ कर सबको दवाई दूंगा और क्या,
विचार अच्छा लगा पर जिस चीज़ के बदले आपको पैसे मिले वो कौनसी सेवा हुई ।बस इतना ही कहना था की वो मुस्कुराए पान थूका और बोले अगर मैं किसी हॉस्पिटल में बैठु तो एक बंधा हुआ समय मैं वहा दूंगा ,मरीज़ों को भी ठीक से समय नही दे पाउँगा, अकड़ के बात करूँगा और समय से 1 घंटा पहले निकल भी जाऊंगा,हो सकता है कोई -कोई दिन मैं जाकर अपनी ड्यूटी ज्वाइन भी न करू  पर यहाँ अपना क्लीनिक है । मरीज़ आते है उन्हें पूरा समय देता हु ,प्यार से बात करता हु , उनका बीमारी को ले कर भ्रम को दूर कर आधा ऐसे ही ठीक कर देता हु ,पैसे होते है तो ले लेता हु नही होते है तो नही लेता हु । तो अब बताओ ये सेवा नही है क्या?
थोड़ी देर तक तो मैं उनको देखती रही पर फिर हाँ में मुंडी हिलाई!!!!!! ख्याल आया की ये तो व्यापारीकरण को बढ़ावा है अगर सेवा ही करनी है तो मुफ़्त में करे !!!!
'ये आजकल के पत्रकार भी न'
"बेटा ! मुफ़्त में इलाज करूँगा तो यहाँ लाइन लग जाएगी ,मैं घर भी नही जा पाउँगा!!!
इनके विचार सुन कर लगा की अब बस तर्क पर वितर्क हो गया है अब इस हिंदुस्तानी से कुतर्क मत करो वरना मेरी गुस्से से लाल मम्मी जो की दवाई ले चुकी है वह समय की कमी के चलते रोटी भी नही देंगी !!!
इस किस्से से एक बात तो साबित होती है " हिंदुस्तान एक ऐसा देश है जहा हर 10 कदम पे सिर्फ संस्कृति ही नही विचार और परिभाषाए भी बदल जाती है"

 

1 comment:

  1. यार ........सिर्फ दवा के पैसे ले रहा हो तो मुझे नहीं लगता की , इसमे कुछ भी बुरा है ।वो भी तो दवा कहीं से खरीद के ही लाता होगा । हाँ अगर फीस ले रहा हो तो सेवा पर संदेह किया जा सकता है ।

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