Friday, 15 February 2019

आखिर.......शादी कब करनी चाहिए?

आखिर.......शादी कब करनी चाहिए?

बचपन का सपना पूरा करते-करते कब बड़े हो गए पता ही नहीं चला, और आज इतने बड़े हो गए हैं कि सपना पूरा करने से थोड़ी ही दूर है. लेकिन, न जाने कब इस सपने के पीछे इतने बड़े हो गए की माँ-बाप की नज़र में शादी के लायक बन गए. अब तो खानदान में मुझसे बड़ी कोई बहन भी नहीं बची जिसकी शादी के पीछे सबकी नजरें टिकी हो. न जाने कब मेरे माँ-बाप से लोग मेरे स्कूल का रिपोर्ट कार्ड छोड़ कर मेरी शादी की तारीख पूछने लगे. इतनी जल्दी, इतना कुछ हो गया? और मैं तो अभी तक उस उंचाई तक पहुँच भी नहीं पाई, जहाँ का सपना मैंने बचपन में देखा था. अब एक बात से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि “सोसाइटी” के हिसाब से मेरी उम्र हो चुकी है. इसलिए मेरे माँ-बाप भी यही चाहते हैं, पर मैं क्या चाहती ये कब और कहाँ तक फर्क ला पाएगा? इसके लिए मेरा ये जानना बहुत जरूरी है कि आखिर.... शादी कब करनी चाहिए?


मैं शर्त लगाती हूँ कि 4 वेद, 18 पुराणों में भी इस सवाल का जवाब नहीं मिल सकता. क्योंकि इसका जवाब हर एक इंसान के लिए अलग-अलग होता है. और आजकल के ज़माने में इस सवाल का जवाब ढूँढना मुश्किल नहीं हैं. जब मैं इस सवाल के जवाब की खोज करने निकली, तो मुझे पता लगा की ज़रूरी क्या होता है? मन की तैयारी. जब आपका मन तैयार हो आपको शादी कर लेनी चाहिए, पर उस हिसाब से तो मैं बचपन में ही तैयार थी जब हिंदी मूवी “ जब वी मेट” का डायलाग फेमस हुआ था. अरे वही वाला “मुझे तो बचपन से ही शादी करने का बड़ा शौक है बाई गॉड”. उस मूवी को सिनेमा हॉल से उतरे 10 साल से ज्यादा हो गया है. मेरा बचपना भी जा चूका है और मुझे अब शादी करने का कोई शौक नहीं है बाई गॉड. पर ये बात माँ-बाप को कौन समझाए? इस कशमकश में हर कोई अपनी ज़िन्दगी में एक न एक बार ज़रूर उलझा है. और दूसरों का पता नहीं पर मैं ज़रुर इस मुसीबत से सबसे अच्छे से निपटना चाहती हूँ.

वैसे तो माता-पिता के लिए उनके बच्चे हमेशा छोटे ही रहते हैं. पर बच्चे की उम्र 23 होते ही माँ-बाप की सोच “कोम्प्लेन” पी लेती है. तो चलिए आपको वर्ल्ड वॉर थ्री से भी बड़ी समस्या का हल बताते है. तो सबसे पहले एक ज्ञान फिर उसका व्याख्यान:

“अक्सर लोग शादी करने के फैसले को लेकर कई बातें मन में बैठा लेते हैं, जिसकी वजह से वो “स्टुपिड” रीज़न से शादी करने का फैसला कर बैठते हैं. जैसे मुझे शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि मेरे सारे दोस्तों की शादी हो चुकी हैं और रिलेटिव्स के ताने सुन-सुनकर कान थक चुके हैं. सच तो ये भी है कि अब अकेले वैलेंटाइन्स डे मनाने का मन नहीं करता. माँ-बाप का कहना भी तो सही है आखिर छोटी बहन की शादी कब होगी अगर मैंने अभी नहीं की तो. सुना है मेडिकली भी माँ बनाने के लिए अभी की उम्र सही है, वर्ना आगे प्रॉब्लम्स आती है. अब एक्स ने भी तो शादी कर ली है, तो चलो मैं भी कर ही लेती हूँ.”

हम जैसे कई लोग अपनी इस सोच के कारण शादी कर बैठते हैं. अब अगर सही मायनो में समझा जाए, तो शादी इन कारणों से नहीं करनी चाहिए. बल्कि तब करनी चाहिए जब इन में से कोई कारण आपको प्रभावित करना बंद कर दे! जब आपका मन कहे कि अब कर लेनी चाहिए. उम्र का कोई भी पड़ाव आपको इतना परिपक्व नहीं बना सकता कि आप शादी जैसी बड़ी जिम्मेदारी को संभाल सके. बस आपको अगर कोई तैयार कर सकता है तो वो है आपका मन, बाकी तो जैसी जिसकी श्रद्धा.


करने वाले तो शादी करने के बाद भी ज़िन्दगी में बहुत कुछ कर गुज़रते हैं, जैसे अमिताब बच्चन, हृतिक रोशन. वहीं, कई लोग शादी के बाद बर्बाद भी हो जाते हैं, जैसे ऐश्वर्या राय, मोहम्मद शमी. कई लोग सिंगल रहकर भी कमाल कर लेते है, जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ अब्दुल कलम आजाद और कई लोग न शादी करके अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर लेते हैं जैसे सलमान खान. खैर ये तो बहुत बड़े बड़े लोगों की बात हो गई पर लड़कियों की बात करे, तो उनका मन से तैयार होना और ज़रूरी है. क्योंकि न जाने कब उनको अपनी डिस्टिंक्शन वाली डिग्री से रोटियाँ लपेटनी पड़ जाए या गोल रोटी बनाने वालों को फाइल्स थमा दी जाए. जय हिन्द!


No comments:

Post a Comment