बचपन से कोई बच्चा खेलने में अच्छा रहा हो तो ऐसी कवायदें लगाई जाती है की उसने फुटबॉल और क्रिकेट ज़रूर खेल होगा, पर मैं अगर अपनी बात करू तो मैंने वॉलीबाल ज़्यादा खेला है, आखिर 2-4 लोगो की ज़रूरत होती है,जगह भी छोटी हो तो चलता है ,खेलना भी आसान होता है और करना क्या है सिर्फ पैर से बॉल को नही छूना है। हाथो का ही इस्तेमाल करना है।
जैसे क्रिकेट के कानूनों को तोड़ कर हम बच्चों ने गली क्रिकेट ईजाद किया।वैसे ही वॉलीबॉल को पैर से खेल कर हमारी टीम को बड़ी ख़ुशी हुई,की नया गेम हमने बनाया है। ये तो कल पता चला की जो खेल हुमलोग बचपन में खेल कर खुश थे असल में वो 15 वीं सदी से चला आ रहा है मतलब क्रिकेट से भी पहले से , असल में इस खेल का नाम है SEPAK TAKRAW ये एक मिक्स्ड जेंडर गेम भी है।ये अपने नाम के अनुसार है। दक्षिण-पूर्व एशियाइ भाषा में Sepak का मतलब kick होता है और TAKRAW का मतलब woven ball । ये खेल पूरी दुनिया में 120 देश खेलते है जिनमे से ज़्यादातर देश यूरोप, अमेरिकन, अफ्रीकन ,एशियाई, मिडिल ईस्ट, सेंट्रल, ईस्ट और ओशिनिया से है।मतलब जितने देश अन्तराष्ट्रीय खेल फूटबाल और क्रिकेट नही खेलते वो सब भी sepak TAKRAW खेलते है। अब आधी दुनिया ये गेम खेलती है तो एक फेडरेशन भी होनी चाहिए। ISAF (INTERNATIONAL SEPAK TAKRAW FEDERATION) हर साल सुपर सीरीज,वर्ल्ड कप, किंग्सकप एशियाई गेम्स, साउथ ईस्ट एशियाई गेम्स का आयोजन करवाती है।
इसमें 2 टीमे होती है जिन्हें 'regus' नाम से भी जाना जाता है। हर टीम में 3 खिलाडी होते है ,जिनमे से 2 नेट के पास और 1 नेट से दूर सेंटर पर खड़े रहते है। इसमें 21-21 के 3 सेट होते है। जो पहले 21 स्कोर कर लेता है वो 1 सेट जीत जाता है और जो ऐसे ही 2 सेट जीतता है वो गेम जीत जाता है।इसमें पैर,घुटना,और सीने से बॉल को छूने की आज़ादी होती है। ये खेल rattan बॉल से खेल जाता है।
ये तो हुई इस खेल की अब तक की जानकारी ,पर क्या आपको पता है मुझे अचानक इसकी याद क्यों आई, न तो पेपर में इसकी कोई खबर है ,न ही न्यूज़ चैनल पे। मुझे इंटरनेट से पता चला है की international de france de sepak takraw आजकल चल रहा है। अपनी टीम इंडिया ने इसमें ब्रोंज मैडल पक्का कर लिया है। स्टेनबॉर्ग में चल रही इस प्रतियोगिता में हम अभी तक अजय है....... हमने फ्रांस,जर्मनी,थाईलैंड और ईरान जैसी बड़ी-बड़ी टीमो को हरा कर अपनी जगह पक्की की है।
ऐसा नही है की इस खेल को कोई देश शौक से देखता नही है। साउथ-ईस्ट एशिया में तो लोगो का धर्म है ये खेल जैसे हमारे लिए क्रिकेट और फ्रांस में तो हर एक प्रतियोगिता के टिकट ज़ोरो से बिक गए, ऐसे में खचा-खच भरे स्टेडियम में इस खेल को पुरे जज़्बे के साथ हूटिंग ,स्लेजिंग को नज़र अंदाज़ कर हर बार अपनी टीम इंडिया ने विजय हासिल की और जिन टीमो को समर्थन 100% दर्शक का रहा उन्हें हरा कर हमे गौरान्वित किया। अब बताइये क्या ऐसे खिलाडीयो को हमारे देशवासियो की तरफ से शाबाशी नही मिलनी चाहिए.......? हम तो इस खेल के बारे में भी नही जानते है और हमारे खिलाडीयो ने फ्रांस जा कर सबकी नाक में दम कर रखा है। मुझे लगता है न्यूज़ पेपर का एक कोना या न्यूज़ चैनल की एक हैडलाइन तो इन्हें मिल ही सकती है, पर किसे फुरसत है। ख़ैर....... मुझे गर्व है अपनी sepak takraw की इंडियन टीम पे।
शाबाश टीम इंडिया!
Sunday, 6 September 2015
आपको पता था क्या!!
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