आखिर एक दिन......
एक दिन तो उसे परवाह करने दो
न जाओ कही ,न आओ, कही न करो कोई बात
आखिर एक दिन....
एक दिन तो परवाह करने दो.....
न जवाब दो, न सवाल पूछो, न करो किसी बात का इज़हार
आखिर एक दिन....
एक दिन तो परवाह करने दो.....
लेकिन मैं क्या करू उसे तो तड़पता छोड़ दू की शायद वो मेरी परवाह करे पर खुद का क्या करू
ए दिल......सुन ले!!!!!!!
उसके लिए धड़कना बंद कर.....
जब वो प्यार ही नही करता है!
तू तो जानता है वो खुदगर्ज़ है!
वो लापरवाह है!
उसे तेरी नही खुद की फ़िक्र है!
क्या ये सच जानकार भी तू अपनी इन हरकतों से बाज़ नही आएगा।
!
मुस्कुरा मत......तेरा जवाब मिल गया.....
तो ठीक है मेरी मान और एक दिन बस एक दिन उससे बात मत कर.....अगर जादू होगा तेरी आशिक़ी में.......तेरी तिश्नगी में.....तो एक दिन वो भी तेरी परवाह करेगा.....ये समय जो वो अकेला कटेगा बताएगा की उसे कितनी परवाह है। ये उसके एहसास के लिए कर। उसकी तेरे लिए जवाब देही के लिए कर। बस एक दिन.....
वो ज़रूर आएगा!!!!!?
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