Thursday, 2 July 2015

डिजिटल व्याकरण

भारत के डिजिटल होने की शुभकामनाए आप सबको, अब हम सब एक ऐसे देश के वासी हो गए है, जहा सिर्फ गंगा ही नही बहती, बल्कि एक क्लिक पे सारी जानकारी भी मिलती है। एक तो हम सब पहले से ही दुनिया में सबसे ज़्यादा इंटरनेट और स्मार्टफोन इस्तेमाल करते है, ऊपर से अब सारी सरकारी सुविधाए  भी डिजिटाइज्ड हो गई है। इसका श्रेह तो मोदी जी को जाता है पर पूरी तरह से नही, इसमें कोंग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री राजीव गांधी जी भी शामिल है। जो कंप्यूटर और इंटरनेट को हमारे घर तक लाए। उस वक़्त कहा गया था की कंप्यूटर किसानो के बड़े  काम आएगा ,तब सवाल उठा की क्या कंप्यूटर हल भी चलाएगा? तब प्रधानमंत्री जी ने जवाब दिया की वो केवल मौसम की जानकारी देगा, कितनी खाद पड़नी है, कब पड़नी है, कौनसी फसल उगनी है ये सब बताएगा। कहना सत्य था पर कंप्यूटर यहाँ आ कर किसानो के काम न आया कारण अनपढ़ ज़्यादा है इस देश में। किसानो ने कभी ध्यान ही नही दिया , इन सरकारी सुविधाओ का लाभ कभी उन तक नही पहुचा। तब ज़माना और था अब ज़माना और है। इस डिजिटल सप्ताह की शुरुआत पे मोदीजी ने कुछ महत्वपूर्ण घोषणाए की है उनपे एक नज़र डालते है आगे की कहानी बयां करने से पहले।
-डिजिटल लॉकर सिस्टम( जहा आप अपने महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स को डिजिटली बदल कर रख सकते है।)
- my.Gov.in (जहा आप सरकारी मसलो पे अपनी राय रख सकते है)
- स्वछ भारत मिशन मोबाइल एप्प
- इ- सिग्नेचर (ITR या व्यापारियो के लिए , आधार से सम्मलित )
- इ- अस्पताल (अपॉइंटमेंट, खून की आवश्यकता पर उपलब्ध होने वह न होने की जानकारी, फीस इत्यादि)
- राष्ट्रिय छात्रवृति पोर्टल
- सभी रिकार्ड्स डिजिटाइज्ड होंगे
- भारत नेट प्रोग्राम
- बीएसएनएल व्हाई-फ़ाई कुछ चिन्हित स्थानो पर
इत्यादि

ये वाकई सराहनीय कदम है पर क्या भारत इसके लिए तैयार है? क्या सच में जो उम्मीद इससे लगाई जा रही है ये उतना कारगर है? या सिर्फ दिखावे की रेस का नंबर 1 घोडा है !
कुछ विशेषज्ञो को ऐसा कहते सुना गया है की अगर सरकार पहले से शुरू कर दी गई योजनाओ को सहेजे  तो भारत किसी भी माइनो में पिछड़ा न रहे, हमे नए योजनाओ की ज़रूरत अभी नही है, बल्कि जो पारित हो चुकी है उनसे अपना आज बेहतर बनाना है। ये नसीहत अच्छी है पर अपने प्रधान सेवक अगर कुछ नया नही करेंगे  तो उन्हें राजीव गांधी जी की तरह याद कैसे रखा जाएगा।
कुछ सवाल अपने प्रधानमंत्री से जो शायद हर भारतीय नागरिक को पूछना चाहिए।
डिजिटल इंडिया का मतलब है की अब डेटा इ-मेल से ट्रान्सफर होगा , तो क्या हमारे ऑफिशल्स इतने 'डिजिटल लिट्रेटे' है की वो .nic.in का इस्तेमाल करेंगे, अपनी जी-मेल आईडी का नही, क्योंकि जी-मेल तो विदेशी कंपनी है। ( कभी.nic.in क्रेश कर गई जो अक्सर कर जाती है ,तब जी-मेल इस्तेमाल किया गया तो हमारा सारा डेटा चाहे डिफेन्स का हो या इकॉनमी का सब विदेशो में काले धन की तरह जमा हो जाएगा)। मान लीजिये की हम इतने लिट्रेटे निकले की .nic.in का  इस्तेमाल  किया, तब हमारी अकलमंदी पर हैकरो की नज़र लग गई तो?  हम तो खोखले हो जाएंगे!
एक घोषणा और की है की ग्राम पंचायतो को भी सर्वर से जोड़ दिया जाएगा , पर आजतक सिर्फ दिल्ली के 50 लाख लोगो को तो जोड़ नही पाए , वो भी साईट क्रैश से परेशान है।
आधार की ज़रूरत को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कीआधार NRI भी बनवा रहे है,वेरिफिकेशन का कोई स्पष्ट तरीका सरकार द्वारा चिन्हित नही किया गया है, रेटिना स्कैन और फिंगरप्रिंट डेटा को पूरी सुरक्षा भी नही दी गई है, इसलिए आधार को बनवाना हर आदमी की मज़बूरी नही है अगर ज़रूरत हो तो बनवाए चाहे ना बनवाए , और आपने आधार को डिजिटल लॉकर और इ-सिग्नेचर से जोड़ दिया।
आप सभी की जानकारी के लिए बता दू की इस डिजिटल इंडिया का कोई 'लीगल होमवर्क' नही किया गया है। डिजिटल सिग्नेचर पहले से पारित है पर 2 साल से कोई नोटिफिकेशन जारी नही की गई है। इसमें कोई सख्ती भी नही है, कॉमर्स इंडस्ट्री पूरी ढील से काम कर रही है । इसमें कोई दोराय नही है की डिजिटल इंडिया से पारदर्शिता बढ़ेगी, नौकरशाही जैसे तमाम कर्को से हम उभरेंगे लेकिन कही ये जल्दबाज़ी में और बड़ा खतरनाक कदम तो साबित नही होगा?  ऐसा न हो की अभी तक हमारे बेहद असंवेदनशील रिकॉर्ड  स्थाई रूप से संकट में थे ,पर अब डिजिटल होते ही इनका इस्तेमाल कोई और न कर ले मसलन ' साइबर क्राइम' जो अभी तक हमारी क़ानूनी समझ में झूल रहा है। इन सभी योजनाओ में बहुत सारी काम की है तो बहुत सारी नाम की ।
फेसबुक, गूगल जैसे साइट्स हिंदुस्तान की रग-रग में बस चुकी है। इनके पास हमारा सारा डेटा है।ये हमे मुफ़्त में अपनी सर्विस दे रही है क्योंकि हम इनके प्रोडक्ट है । ये हमारे बारे में सभी बारीकियो से अवगत है। अब हमे ऐसा कोई कानून लाना चाहिए जो हमारे डेटा ट्रान्सफर करने पर पेनलिटी के नाम पे इनसे वसूला जाए । जैसे यूरोप में हुआ , डेटा ट्रान्सफर का दोषी पाए जाने पर यूरोप गवर्मेंट ने गूगल के टर्नओवर ओवर पर 10% की पेनलिटी लगा दी थी, और  गूगल को भरना पड़ा । यूरोप देश से कोई भी डेटा बाहर ले जाएगा तो उसे जेल हो जाएगी। ऐसे कानूनों की ज़रूरत भी हो गई है क्योंकि डिजिटल इंडिया अब एक उपलब्धि ही नही ज़िम्मेदारी भी बन गया है।
मैकिंसे और फेसबुक की ग्लोबल स्टडी के मुताबिक भारतीय जनसंख्या में 1 बिलियन लोग इंटरनेट इस्तेमाल नही कर रहे है क्योंकि वो देहात में रहते है, अनपढ़ है और उनके आस-पास का माहौल  भी प्रोत्साहित नही करता। ऐसे 37% भारतीय वयस्क है जो अनपढ़ है मतलब 287 मिलियन । अब कही "डिजिटल इंडिया" , "डिजिटल डिवाइड" में न बदल जाए।
जिस तरह एक उम्मीद की किरण हर जगह होती है , वैसे ही यहाँ भी एक खबर आई है महाराष्ट्र के एक गाव में किसान कॉल सेंटर से परेशान होकर किसानो ने एक ' बाली राजा' नाम से व्हाट्सअप ग्रुप बनाया है और उसमे कई खेती विशेषज्ञो को जोड़ा है। अब वहा के किसान अपनी समस्या का समाधान व्हाट्सअप से करते है, क्योंकि ये हिन्दुस्तान है । दुनिया को अचम्भे में डालना हमारा काम है । उम्मीद करते है की हम मतलब हिन्दुस्तान ये फिर से कर के  दिखाएंगे। जय हिन्द।

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