Wednesday, 27 May 2015

यहाँ क्रिकेट से कोई प्यार नही करता

हिन्दुस्तान में बच्चा पैदा होते ही अपने माँ-बाप का नाम बाद में लेता  है ,उससे पहले वो बल्ला पकड़ना सीख जाता है ।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यहाँ के लोगो का धर्म हो चूका है क्रिकेट जिसको हर हिन्दू, मुसलमान,सिख ,ईसाई बराबर से मानते है। ठीक वैसे ही जैसे ब्राज़ील जैसे देशो में फुटबॉल को लेके मान्यता है। इन दोनों देशो में एक ही बात सामान्य है , ये दोनों देश अपने-अपने खेल को बहुत प्यार करते है।.....
ऐसा कहने सही है क्या?... क्या सच में हमे क्रिकेट से प्यार है या क्रिकेटर से प्यार है?
अपनी बात को साबित करने के लिए कुछ आंकड़े पेश है....
BCCI हर साल भारतीय पुरुष टीम को 3 भागो में कॉन्ट्रैक्ट के नाम पे बाटती है।
Grade-A players- 1 crore
Grade-B players-50 lakh
Grade-C players-25 lakh
इसके अलावा कुछ अलग से हर मैच के बाद देती है, मसलन
Test match- 7 lakh/match/Player
One-day- 4 lakh/match/player
T-20- 2 lakh/match/player
क्रिकेट के भक्तो को मैं ये बता दू की ये आंकड़े सिर्फ भारतीय पुरुष टीम के है।
अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की बारी
BCCI ने कोई grading प्रणाली का इस्तेमाल यहाँ नही किया है। यहाँ पर सिर्फ मैच खेलने के बाद कुछ चिल्लर मिल जाता है जैसे....
Test match- 3000/match/player
One-day- 2500/match/player
T-20- 1250/match/player
यहाँ तक वर्ल्डकप का भी बजट सस्ता रखा जाता है। 2011पुरुष वर्ल्डकप में 160 मिलियन खर्च किये गए थे पर महिला क्रिकेट वर्ल्डकप को 45 गुना कम खर्च में तैयार किया गया था।
इस मसले को वापस लाते हुए एक और बात पुरुष  खिलाडी को एक टेस्ट मैच में 7 लाख मिलते है पर एक महिला खिलाडी को पूरी सीरीज खेलने के 1 लाख मिलते है।
रणजी पुरुष खिलाडी को 1.4 लाख मिलता है। वही महिला रणजी खिलाडी को 2500 मिलता है। U-16 बॉयज विजय मर्चेंट ट्रॉफी विजेता को 4 लाख और सीनियर/महिला टीम को 3 लाख (किसी भी डोमेस्टिक ट्रॉफी के लिए)
और तो और रणजी ट्रॉफी विजेता पुरुष टीम को 2 करोड़ और दीलिप ट्रॉफी विजेता को 30 लाख
पर महिला टीम को 2 लाख.....
अबकी मसला महिला या पुरुष का नही है ।अबकी मसला हमारे क्रिकेट प्रेम का है । हमे क्रिकेट से नही बल्कि कुछ खिलाडीयो से प्रेम है ।जो व्यापारीकरण की पैदावार है।
वैसे अंधे प्रेम से याद आया हमारे पास एक नेत्र-हींन क्रिकेट टीम भी है ।जिसके कप्तान है शेखर नइर् ...इनकी सैलरी प्रति महीना 13000 है।
मिड-डे को दिए एक इंटरव्यू में 29 वर्ष के शेखर कहते है "हमलोगो को T-20 वर्ल्डकप 2014 जीतने के बाद सिर्फ विराट और शिखर धवन ने ट्वीट करके बधाई दी थी और किसी ने कुछ भी नही कहा"
कप्तान ने ये भी कहा की 2013 में उन्होंने सरकार से एक सरकारी नौकरी की गुज़ारिश की थी क्योंकि 13000 में उनका घर चला पाना मुश्किल था पर सरकार ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। भारत में कुल 35000 नेत्र-हींन क्रिकेट के खिलाडी है । शायद सिर्फ ये क्रिकेटर्स ही क्रिकेट को प्यार करते है । हम नही......
वर्ना इतना सब होने के बावजूद अगर वो खेल रहे है तो ये प्रेम ही एकलौता कारण हो सकता है।......
भारत जैसे देश में क्रिकेट की ये हालात है तो बाकी के खेलो की बात ही जाने देते है। 'यहाँ कुछ तो गलत हो रहा है'

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