हिन्दुस्तान में बच्चा पैदा होते ही अपने माँ-बाप का नाम बाद में लेता है ,उससे पहले वो बल्ला पकड़ना सीख जाता है ।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यहाँ के लोगो का धर्म हो चूका है क्रिकेट जिसको हर हिन्दू, मुसलमान,सिख ,ईसाई बराबर से मानते है। ठीक वैसे ही जैसे ब्राज़ील जैसे देशो में फुटबॉल को लेके मान्यता है। इन दोनों देशो में एक ही बात सामान्य है , ये दोनों देश अपने-अपने खेल को बहुत प्यार करते है।.....
ऐसा कहने सही है क्या?... क्या सच में हमे क्रिकेट से प्यार है या क्रिकेटर से प्यार है?
अपनी बात को साबित करने के लिए कुछ आंकड़े पेश है....
BCCI हर साल भारतीय पुरुष टीम को 3 भागो में कॉन्ट्रैक्ट के नाम पे बाटती है।
Grade-A players- 1 crore
Grade-B players-50 lakh
Grade-C players-25 lakh
इसके अलावा कुछ अलग से हर मैच के बाद देती है, मसलन
Test match- 7 lakh/match/Player
One-day- 4 lakh/match/player
T-20- 2 lakh/match/player
क्रिकेट के भक्तो को मैं ये बता दू की ये आंकड़े सिर्फ भारतीय पुरुष टीम के है।
अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की बारी
BCCI ने कोई grading प्रणाली का इस्तेमाल यहाँ नही किया है। यहाँ पर सिर्फ मैच खेलने के बाद कुछ चिल्लर मिल जाता है जैसे....
Test match- 3000/match/player
One-day- 2500/match/player
T-20- 1250/match/player
यहाँ तक वर्ल्डकप का भी बजट सस्ता रखा जाता है। 2011पुरुष वर्ल्डकप में 160 मिलियन खर्च किये गए थे पर महिला क्रिकेट वर्ल्डकप को 45 गुना कम खर्च में तैयार किया गया था।
इस मसले को वापस लाते हुए एक और बात पुरुष खिलाडी को एक टेस्ट मैच में 7 लाख मिलते है पर एक महिला खिलाडी को पूरी सीरीज खेलने के 1 लाख मिलते है।
रणजी पुरुष खिलाडी को 1.4 लाख मिलता है। वही महिला रणजी खिलाडी को 2500 मिलता है। U-16 बॉयज विजय मर्चेंट ट्रॉफी विजेता को 4 लाख और सीनियर/महिला टीम को 3 लाख (किसी भी डोमेस्टिक ट्रॉफी के लिए)
और तो और रणजी ट्रॉफी विजेता पुरुष टीम को 2 करोड़ और दीलिप ट्रॉफी विजेता को 30 लाख
पर महिला टीम को 2 लाख.....
अबकी मसला महिला या पुरुष का नही है ।अबकी मसला हमारे क्रिकेट प्रेम का है । हमे क्रिकेट से नही बल्कि कुछ खिलाडीयो से प्रेम है ।जो व्यापारीकरण की पैदावार है।
वैसे अंधे प्रेम से याद आया हमारे पास एक नेत्र-हींन क्रिकेट टीम भी है ।जिसके कप्तान है शेखर नइर् ...इनकी सैलरी प्रति महीना 13000 है।
मिड-डे को दिए एक इंटरव्यू में 29 वर्ष के शेखर कहते है "हमलोगो को T-20 वर्ल्डकप 2014 जीतने के बाद सिर्फ विराट और शिखर धवन ने ट्वीट करके बधाई दी थी और किसी ने कुछ भी नही कहा"
कप्तान ने ये भी कहा की 2013 में उन्होंने सरकार से एक सरकारी नौकरी की गुज़ारिश की थी क्योंकि 13000 में उनका घर चला पाना मुश्किल था पर सरकार ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। भारत में कुल 35000 नेत्र-हींन क्रिकेट के खिलाडी है । शायद सिर्फ ये क्रिकेटर्स ही क्रिकेट को प्यार करते है । हम नही......
वर्ना इतना सब होने के बावजूद अगर वो खेल रहे है तो ये प्रेम ही एकलौता कारण हो सकता है।......
भारत जैसे देश में क्रिकेट की ये हालात है तो बाकी के खेलो की बात ही जाने देते है। 'यहाँ कुछ तो गलत हो रहा है'
Wednesday, 27 May 2015
यहाँ क्रिकेट से कोई प्यार नही करता
Monday, 18 May 2015
लेडी लक......!!!!!
दुनिया का हर इलज़ाम जब तक औरतो पर ना डाला जाए तब तक कोई कार्य पूरा नही माना जाता। किसी भी घटित घटना उर्फ़ ज़रा सी बात को अगर आदमी असंवेदनशील हो कर नज़रअंदाज़ कर दे तो उस पर 'जोरू का गुलाम' होने की तख्ती समाज द्वारा लटक दी जाती है। (नज़रअंदाज़ करे आदमी और इलज़ाम औरत पे)
अब जब वह आदमी ज़िन्दगी में कुछ करने की सोचता है तो लोग उसे 'लेडी लक' के भरोसे छोड़ देते है। मतलब साफ़ है अगर मुकाम हासिल कर लिया तो खुद की मेहनत (कारण स्त्री से वियोग) अगर असफल हुए तो लेडी लक (कारण स्त्री का संयोग)
'वो तो मनहूस है ही ,ज़िन्दगी बर्बाद कर दी उसकी '
अभी हाल ही मे इस तरह के लांछन का घटनाक्रम आपको याद होगा । जिसका शिकार अनुष्का शर्मा हुई। जब तक विराट सफल हुए वो उनकी मेहनत थी जिस दिन असफल हुए सारा ठीकरा अनुष्का के सर फोड़ दिया। समझ नही आता है की ये इसलिए हुआ क्योंकि ये पुरुष प्रधान देश है या ये हिंदुस्तान है , जहा औरतो का नसीब उनसे जुड़े मर्दों के कार्य और कामयाबी से आक़ा जाता है। चलिए इसको अगर सच मान ले तो बात बराबरी की होनी चाहिए मसलन 'लेडी लक' जैसी कोई बात आदमियो पे लागु होती है तो कोई 'जेंटलमेन लक' भी होना चाहिए जो औरतो पे लागू हो .....
आखिर हर बार आदमी ही क्यों नाकारा साबित हो .....औरतो को भी भोगना पड़े बराबर से..... । गुस्ताखी माफ़ कीजियेगा पर थोडा सोचिये तो अगर ऐसा होता तो हिंदुस्तान के मर्द सबसे मनहूस है लक के मामले में क्योंकि यहाँ की औरतो की हालात सबसे बुरी है गिनती की कुल 25% ही सफल है बाकि तो घर गिरस्ती और घरेलू हिंसा से ढकी हुई है।
फेसबुक की फीड पढ़ते हुए अचानक एक पोस्ट पे नज़र गई जहा लिखा था अभी तक मुम्बई इंडियन लूट रही है जब से रोहित ने सगाई की उनका लेडी लक काम नही आया है ।फिर जब वही टीम प्लेऑफ तक पहुच गई तो वही अकाउंट कहता है की ये उनकी टीम वर्क और मेहनत का कमाल है....
ऐसी बिखरी और चिल्लर सोच रखने वालो को कोई ये बताओ की क्रिकेट में आप अपनी फॉर्म और फिटनेस को खरीद नही सकते हो चाहे कितने ही अमीर क्यों न हो आप। और जब बात क्रिकेट की हो तो इसमें अलग के लोगो को क्यों लाना, ऐसे तो हमारे पास एक महिला क्रिकेट टीम भी है जिसमे से हिन्दुस्तान की जनता ने सिर्फ दो ही नाम सुने है मिताली राज और झूलन देवी कुछ ने तो शायद वो भी नही सुने होंगे......... खैर!!!! उनके अलाव उस टीम में 9 खिलाडी और भी है जिन्हें कोई नही जानता तो उनसे जुड़े मर्दों पर कोई निशाना क्यों नही साधता......
ऐसे हालातो में 2 रहस्यों से पर्दा उठता है पहला "हिन्दुस्तानी औरते बहुत खुशनसीबी से बदनसीब है"
दूसरा" हमारे पुरुष खुद कुछ नही कर सकते क्योंकि सब औरतो के नसीब का खेल है"
मर्ज़ी आपकी इसे जैसे देखना चाहे देख सकते है।
Saturday, 16 May 2015
Mysteries of fielding postions
Slip- wo position jisme fielder wicket keeper ke next khada hota hai ....
In case keeper koi catching opportunity 'slip'( miss) krde to fielder uske mistake ko cover krle...
Point-(direction of face of the bat)
Pehle jab 'point' naam rakha gaya tha tab ye position batsman ke kafi kareeb thi but scanario change ho chuka hai but naam wahi hai #flaw...
Gully-iska koi sambhandh gully cricket se Nhi hai...
'Gully' means a narrow channel
'Slip' or 'point' close fielding positions hai but jab ball unke gap se nikalti hai to captain ek or player ko bhejta hai jiski position ko gully kehte hai wo boundary ke pass reh kr gap cover krta hai...
Third man- jo 'slip' or 'point' ke gap ko unke pass reh kar cover kare....
Isko third man isiye bhi kehte hai cause first man or second man slip or point ko assume kr liya jaata hai...
Covers- wo fielder jo 'point' or 'mid-wicket' ke beech ke area ko cover kare.... generally yaha sabse fittest player ko lagate hai for example ravindra jadega
Mid-on Mid-off- ab tak aap jaisa sochte aa rahe the waisa nhi hota hai...
Mid-on mid-off na zyaada door hote hai batsman se na zyaada pass hote hai ...
Long on long off- batsman se door boundaries ke pass
Square leg- batting crease ke end pe jo umpire hota hai use 'square leg umpire' kehte hai ....jab batsman apna bat off side se leg side tak move karata hai tab ek square maintain hota hai waha khade fielder ko square leg fielder kehte hai ...
Fine leg- batsmen square shot se jitna forward move karata hai apna bat ko wo utna fine shot ban jaata hai jiske liye fine leg fielder kaam aata hai....
Filhaal itni hi jaankari hai mere pass aage or milte hi aap sabko inki jaankaari dungi....