Friday, 18 December 2015

Feeling 99% downloading

जब-जब 99% डाउनलोडिंग का दृश्य देखने को मिलता है तब-तब दिल की धड़कने किसी इलेक्ट्रिक इंजन वाली रेलगाड़ी से भी तेज़ भागने  लगती है। ऐसा लगता है जैसे मिस्बाह-उल-हक़ बैटिंग पे खड़ा है,उसे सिर्फ 4 रन चाहिए आखिरी बाल है और बोलिंग जोगिन्दर कर रहा है(ये उपमा उन लोगो के लिए दी है जो 99% डाउनलोडिंग के डर से कभी नही गुज़रे.......!) जनाब ऐसे ही हालात होते है, जब दिल सीने में नही मुह तक आ कर धड़कता है।वैसे इस समस्या की एक अच्छी बात होती है,ऐसे हालातो का सामना आपको सिर्फ 1 या 2 मिनट के लिए ही करना पड़ता है फिर या तो छक्का पड़ता है या बल्लेबाज़ आउट हो जाता है मतलब फ़ाइल 100% डाउनलोड हो जाती है या फिर error लिख के आ जाता है। ख़ुशी इस बात की है की हर बार भगवान् इतना दयावान हो ही जाता है की दिल का दौरा पड़ने से पहले एक पडला भारी कर देता है।
              आज मेरे दिमाग में ये ख़याल इसलिए आया क्योंकि मैं आपको नही बताना चाहती की मैं भी इन्ही हालातो से गुज़र रही हूँ । अब ये मैं बिलकुल नही बताउंगी की मैं इतनी बुरी तरह से ग्रसित हूँ की मेरा ये समय 1 या 2 मिनट का नही बल्कि 4-5 दिन लम्बा खिच गया है पर उम्मीद के आलावा मेरे पास कोई चारा नही, ऐसे नही है की मैं इंसान ही असामर्थ्यवान हूँ लेकिन मुझे ये दिन काटने ही पड़ेंगे । बिना किसी गंभीर चर्चा का विषय बने मैंने अपना ध्यान एक कथन पर केंद्रित किया जिसमे भगवान् श्री कृष्णा कहते है ' इस दुनिया में जो भी होता है वो मेरी ही मर्ज़ी से होता है' मतलब मेरे साथ भी जो हो रहा है उसमे श्री कृष्णा की मर्ज़ी हुई अब पता नही भगवान् जो करता है वो क्या समझ के करता है। ये कथन मुझे सांत्वना देने के लिए काफी ही था की श्री राम भगवान् से देखा न गया उन्होंने रामायण में कह डाला 'हर एक कार्य के निष्पादन(सक्रियता) या निष्क्रियता के लिए मनुष्य  द्वारा ईश्वर को दोषी ठहराना समस्त मनुष्य जाती के लिए धिक्कार(लानत) के समान है'  समस्त मनुष्य जाती पर लानत बनने  से अच्छा है की अपने साथ जो कुछ भी होता आ रहा है उसकी ज़िम्मेदारी मैं खुद ही ले लू  तो बेहतर होगा । बस एक ये ही कामना है की ऐसी फीलिंग के साथ किसी को 4-5 दिन न गुज़ारने पड़े । अब फिलहाल मैं आश्वस्त हूँ।